देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावों को लेकर Supreme Court of India ने बुधवार को अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने Election Commission of India द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध ठहराया है।
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और इसके लिए मतदाता सूची की शुद्धता बेहद जरूरी है। कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की जांच और सत्यापन का अधिकार है।
क्या है SIR प्रक्रिया?
चुनाव आयोग ने बिहार, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए Special Intensive Revision (SIR) अभियान शुरू किया था। इस प्रक्रिया के तहत उन मतदाताओं से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिनके नाम पुरानी वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं थे या जिनकी जानकारी सत्यापन के दायरे में आई।
आयोग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों के जरिए मतदाता सूची में शामिल हुए संदिग्ध नामों की पहचान करना और वोटर लिस्ट को अधिक पारदर्शी बनाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव आयोग को विशेष पुनरीक्षण (SIR) करने का अधिकार है। अदालत ने माना कि मतदाता सूची की सटीकता बनाए रखने के लिए सीमित स्तर पर नागरिकता सत्यापन किया जा सकता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड या सामान्य वोटर आईडी अकेले नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जा सकते। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह पैदा होता है, तो चुनाव आयोग जांच कर सकता है।
पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश
अदालत ने कहा कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे, उनकी सूची कारणों सहित सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान यदि किसी मामले में नागरिकता से जुड़ा विवाद सामने आता है, तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
बिहार और बंगाल में सबसे ज्यादा असर
इस फैसले का सबसे अधिक असर बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में देखने को मिल सकता है, जहां पहले से ही बड़े स्तर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम चल रहा है। सीमावर्ती जिलों में दस्तावेज सत्यापन और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
कई विपक्षी दलों और संगठनों, जिनमें Association for Democratic Reforms भी शामिल है, ने SIR प्रक्रिया को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। विपक्ष का आरोप था कि यह प्रक्रिया नागरिकता जांच के नाम पर लोगों को वोटिंग अधिकार से बाहर करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और चुनाव आयोग की प्रक्रिया को वैध माना।










