वाराणसी। कचहरी परिसर में मंगलवार को हुई हिंसक घटना के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। वकीलों द्वारा दारोगा मिथिलेश प्रजापति और सिपाही राणा प्रसाद पर हमले की घटना के दो दिन बाद, गुरुवार सुबह दारोगा के परिजन पुलिस कमिश्नरेट (सीपी) दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि हमलावरों पर तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
यह विवाद दरअसल एक पुराने जमीनी मामले से जुड़ा था। 13 सितंबर को समाधान दिवस के दौरान बहस बढ़ी तो पुलिस ने शांति भंग में चालान किया। वकीलों का आरोप था कि इसी दौरान दारोगा ने एक वकील से मारपीट की थी। इसी रंजिश में 16 सितंबर को दारोगा जब कचहरी में रिमांड पर्चा लेने पहुंचे, तो वकीलों ने उन पर और साथ गए सिपाही पर हमला कर दिया। हमलावरों ने दारोगा की वर्दी फाड़ दी और दोनों को बेरहमी से पीटा। हालत बिगड़ने पर दारोगा को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
घटना के बाद कचहरी में पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है, लेकिन परिजन कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करने लगे। उनका कहना है कि यदि वर्दीधारी की सुरक्षा नहीं होगी, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे।










