Varanasi : स्कूली बच्चों को ध्वनि प्रदूषण से किया गया जागरूक, पुलिस हेल्पलाइन नंबर और सहायता की दी गई जानकारी

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वाराणसी। सावन के महीने में सड़कों से डीजे की तेज आवाज़ में आई कमी को लेकर आज सनबीम स्कूल, अन्नपूर्णा में विद्यार्थियों के बीच खास जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई, बल्कि उन्हें पुलिस हेल्पलाइन 112 और UPCOP एप के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त करने के तरीकों से भी अवगत कराया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ‘सत्या फाउंडेशन’ के सचिव चेतन उपाध्याय मौजूद थे। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि शोर का असर केवल कानों पर नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, रक्तचाप, नींद, एकाग्रता और स्मरणशक्ति पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि ध्वनि की तीव्रता 40-50 डेसीबल होनी चाहिए, लेकिन अधिकतर धार्मिक या सामाजिक आयोजनों में यह सीमा पार कर जाती है।

कानूनी जानकारी भी दी गई

चेतन उपाध्याय ने बताया कि भारत में दिन के समय 70-75 डेसीबल तक की आवाज़ की अनुमति है, लेकिन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी प्रकार की तेज आवाज़ पर पूरी तरह प्रतिबंध है। यह नियम सभी धार्मिक स्थलों – मंदिर-मस्जिद – पर भी समान रूप से लागू होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सिखाया कि अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करता है तो 112 नंबर पर कॉल करके गुप्त शिकायत की जा सकती है। साथ ही UPCOP मोबाइल एप से भी घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।

रोड डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग

कार्यक्रम में एक अनूठी जनमत संग्रह भी कराई गई, जिसमें सवाल पूछा गया – क्या रोड पर बजने वाले डीजे पर साल भर के लिए पूरी तरह प्रतिबंध लगना चाहिए? जवाब में सभी विद्यार्थियों ने हाथ उठाकर इसका समर्थन किया और कहा कि बारात हो या धार्मिक जुलूस, रोड डीजे पर सख्त रोक जरूरी है।

प्रधानमंत्री और प्रशासन की सराहना

सावन के महीने में डीजे के शोर में आई कमी को लेकर चेतन उपाध्याय ने कहा कि इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, और वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल (आईपीएस) को जाता है, जिन्होंने इस दिशा में सख्त और प्रभावी कदम उठाए। विद्यार्थियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इन प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम का संचालन तुषार सिंह ने किया और प्रधानाचार्या ममता जायसवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए इस अभियान को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी और समयानुकूल बताया।

Ankita Yadav
Author: Ankita Yadav

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