दिल्ली-NRC में जहरीली हवा का कहर, कांग्रेस का केंद्र को घेरा, NCAP को बताया ‘कागजी योजना’

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दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के इलाकों में सर्दी के मौसम के साथ वायु प्रदूषण ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजधानी के लोग इन दिनों कड़ाके की ठंड और जहरीली हवा की दोहरी मार झेल रहे हैं। शनिवार के बाद रविवार सुबह भी दिल्ली के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में बनी रही।

एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार सुबह राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 297 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालात को देखते हुए राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने वायु प्रदूषण को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस का आरोप: देशव्यापी संरचनात्मक संकट

कांग्रेस ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि वायु प्रदूषण सिर्फ दिल्ली की समस्या नहीं, बल्कि यह पूरे देश का ढांचागत संकट बन चुका है। पार्टी का कहना है कि इस गंभीर मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया नाकाफी और अप्रभावी रही है। कांग्रेस ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) में व्यापक सुधार की मांग की है।

कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि NCAP अब ‘नेशनल’ नहीं बल्कि ‘नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’, यानी सिर्फ कागजी योजना बनकर रह गया है। उन्होंने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के ताजा विश्लेषण का हवाला देते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

44 प्रतिशत शहर गंभीर प्रदूषण की चपेट में

जयराम रमेश ने बताया कि सैटेलाइट डेटा पर आधारित CREA के अध्ययन के अनुसार, देश के 4,041 वैधानिक नगरों में से 1,787 शहर, यानी करीब 44 प्रतिशत शहर, लगातार गंभीर वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं। इन शहरों में बीते पांच वर्षों (2019 से 2024, वर्ष 2020 को छोड़कर) के दौरान PM2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से ऊपर बना रहा।

NCAP की सीमाएं उजागर

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रदूषण की गंभीरता के बावजूद NCAP के तहत सिर्फ 130 शहरों को ही शामिल किया गया है। इनमें से भी 28 शहरों में एयर क्वालिटी मापने के लिए CAAQMS स्टेशन तक मौजूद नहीं हैं। जिन 102 शहरों में निगरानी की व्यवस्था है, उनमें से 100 शहरों में PM10 का स्तर 80 प्रतिशत या उससे अधिक पाया गया।

कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा स्थिति में NCAP देश के केवल 4 प्रतिशत गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों को ही कवर कर पा रहा है, जो इसकी विफलता को दर्शाता है।

व्यापक सुधार की मांग

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि NCAP की गहन समीक्षा, व्यापक सुधार और पुनर्गठन किया जाए, ताकि वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। पार्टी का कहना है कि जब तक ठोस और ज़मीनी स्तर पर कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक देश की हवा साफ होने की उम्मीद सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगी।

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Author: News Rastra

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