दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आबकारी नीति मामले में सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल की ओर से दायर याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया। इस दौरान केजरीवाल ने कोर्ट में खुद अपनी पैरवी की।
इस फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है। संजय राउत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए। मुंबई में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह देश की न्याय प्रणाली के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
राउत ने कहा, “अगर किसी को न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है और उसके पीछे ठोस कारण हैं, तो इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।”
महाराष्ट्र बीजेपी पर भी साधा निशाना
संजय राउत ने इस मुद्दे के साथ-साथ महाराष्ट्र की राजनीति पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में ड्रग्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और कई शहर इससे प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा, “मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और सतारा में ड्रग्स की समस्या गंभीर हो चुकी है। ऐसे में राजनीतिक मुद्दों को भटकाने के लिए अन्य विषय उठाए जा रहे हैं।”
महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन पर भी टिप्पणी
राउत ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल पहले ही पास हो चुका है और उस पर राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जब बिल पहले ही पास हो चुका है, तो फिर किस बात का मोर्चा निकाला जा रहा है?”
ओपन डिबेट की चुनौती
राउत ने आगे कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने खुली बहस की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि अगर बहस करनी है तो समान स्तर के नेताओं के बीच होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।









