लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर सुप्रिया सुले ने बड़ा बयान दिया है। सोमवार (20 अप्रैल) को उन्होंने राहुल गांधी का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी जांच एजेंसी से डर नहीं लगता।
उन्होंने कहा, “अगर ईमानदारी के लिए ओलंपिक में कोई मेडल होता, तो राहुल गांधी निस्संदेह उसे जीतते।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
महिला आरक्षण पर क्या बोलीं सुप्रिया सुले?
महिला आरक्षण को लेकर सुप्रिया सुले ने सरकार के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में महिलाओं के आरक्षण का बिल नहीं था, बल्कि यह परिसीमन (Delimitation) से जुड़ा मामला है।
सुले के मुताबिक, महिला आरक्षण विधेयक पहले ही साल 2003 में पारित हो चुका है और इसे राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित भी किया जा चुका है। ऐसे में मौजूदा बहस को अलग तरीके से पेश किया जा रहा है।
अपर्णा यादव के विरोध से बढ़ी सियासी गर्मी
वहीं दूसरी ओर अपर्णा यादव के विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। महिला आरक्षण बिल पारित न होने पर उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाए थे।
सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि यह कदम “भारतीय नारी शक्ति की अस्मिता की रक्षा” के लिए उठाया गया है। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकारों का विरोध करने का आरोप भी लगाया और इस दिन को “काली रात” बताया।
सियासत में बढ़ा टकराव
महिला आरक्षण और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर बीजेपी विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों को रोकने का आरोप लगा रही है।









