दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव अब और बढ़ गया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक अहम फैसला लेते हुए घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का निर्देश दिया है।
यह कदम खास तौर पर उन चीनी पेट्रोकेमिकल कंपनियों को बचाने के लिए उठाया गया है, जिन पर अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया है।
चीन का ‘ब्लॉकिंग स्टैच्यूट’ पहली बार लागू
चीन ने पहली बार अपने “ब्लॉकिंग स्टैच्यूट” का इस्तेमाल किया है। यह एक ऐसा कानूनी प्रावधान है, जिसका मकसद विदेशी कानूनों के प्रभाव को अपने देश में निष्प्रभावी करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम केवल कूटनीतिक विरोध नहीं, बल्कि अमेरिका के खिलाफ सीधी कानूनी जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है।
इन 5 कंपनियों को मिला संरक्षण
चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, जिन कंपनियों को इस फैसले से राहत मिली है, उनमें शामिल हैं:
- Hengli Petrochemical (Dalian) Refining Company Ltd.
- Shandong Shouguang Luqing Petrochemical Company Ltd.
- Shandong Jincheng Petrochemical Group Company Ltd.
- Hebei Xinhai Chemical Group Company Ltd.
- Shandong Shengxing Chemical Company Ltd.
अमेरिका ने इन कंपनियों को अपनी “स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स (SDN)” सूची में डाल दिया है, जिससे उनकी संपत्तियां फ्रीज हो सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका के आरोप और चीन की प्रतिक्रिया
अमेरिका का आरोप है कि ये कंपनियां ईरान के तेल कारोबार में शामिल हैं और उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।
वहीं चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यापार नियमों के खिलाफ है। चीन ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।
‘टीपॉट रिफाइनरी’ भी रडार पर
अमेरिका के Office of Foreign Assets Control (OFAC) ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि चीन की छोटी स्वतंत्र तेल रिफाइनरियां, जिन्हें “टीपॉट रिफाइनरी” कहा जाता है, ईरानी तेल के आयात और प्रोसेसिंग में शामिल हैं।
खासतौर पर शेडोंग प्रांत की ये रिफाइनरियां 2026 तक इस व्यापार में अहम भूमिका निभा रही हैं, जिसके चलते अमेरिका ने इन पर निगरानी बढ़ा दी है।
राष्ट्रीय हितों की रक्षा का दावा
चीन ने साफ कहा है कि यह फैसला उसकी संप्रभुता, सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। साथ ही चीन ने दोहराया कि वह उन प्रतिबंधों का विरोध करता है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी नहीं मिली है।










