नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संसद में तीन नए विधेयक पेश किए। हालांकि, इन बिलों को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिलों का विरोध करते हुए कहा कि यह सरकार को “जज और जल्लाद” बनने की खुली छूट देता है।
ओवैसी का हमला – लोकतंत्र पर सीधा खतरा
लोकसभा में बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि ये बिल शक्तियों के बंटवारे की बुनियादी व्यवस्था का उल्लंघन करते हैं और जनता को सरकार चुनने के अधिकार से वंचित करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों से कार्यकारी एजेंसियों को सिर्फ शक और आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने की ताकत मिल जाएगी।
ओवैसी ने आगे कहा, “सरकार देश को पुलिस राज्य में बदलने की कोशिश कर रही है। यह चुनी हुई सरकारों के लिए मौत की कील साबित होगा और संविधान के साथ खिलवाड़ है।”
130वें संविधान संशोधन विधेयक पर बवाल
तीन नए बिलों में सबसे ज्यादा विवाद 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, यदि किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री पर गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है और वे लगातार 30 दिन तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा। अमित शाह ने इस बिल को पेश करते समय बताया कि सरकार इसका विस्तृत अध्ययन कराने के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव रखती है।
विपक्ष का आरोप– लोकतंत्र पर ‘डेथ नेल’
ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर ये बिल लागू हुए तो यह भारत के लोकतंत्र की जड़ों को हिला देंगे। उनके मुताबिक यह कदम जनता की आवाज दबाने और चुनी हुई सरकारों को कमजोर करने की साजिश है।










