लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास कराने के लिए अनावश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मांगे जाएंगे। केवल विशेष और आवश्यक परिस्थितियों में ही NOC लिया जाएगा, वह भी एक तय प्रोफार्मा के माध्यम से। इसके साथ ही किसी भी आपत्ति का निस्तारण अधिकतम 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।
यह निर्देश प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद ने विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों के साथ हुई बैठक में जारी किए। उन्होंने साफ कहा कि बिना ठोस वजह किसी भी नक्शे को लंबित न रखा जाए और प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से न रोका जाए।
लंबित नक्शों की संख्या ने बढ़ाई चिंता
बैठक में सामने आया कि दिसंबर 2025 तक प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों में कुल 2517 नक्शे जमा किए गए थे। इनमें से सिर्फ 596 नक्शों को ही मंजूरी मिली, जबकि 373 को खारिज कर दिया गया। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि 1544 नक्शों पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
नियमों में संशोधन के लिए समिति गठित
नक्शा पास करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए आवास विभाग ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की सिफारिशों के आधार पर नियमों में जरूरी संशोधन किए जाएंगे और प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में अपनाई जा रही प्रक्रिया को मॉडल बनाकर प्रदेश के अन्य सभी विकास प्राधिकरणों में लागू किया जाए।
केवल जरूरी मामलों में ही मांगी जाएगी NOC
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब NOC केवल शासकीय भवनों, हेरिटेज स्थलों या संवेदनशील क्षेत्रों में ही अनिवार्य होगी, जहां इसकी वास्तव में जरूरत हो। नक्शा पास करने की पूरी प्रक्रिया उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि और जोनिंग रेगुलेशंस-2025 के तहत संचालित की जाएगी।
सरकार के इस फैसले को भ्रष्टाचार, अनावश्यक देरी और आम लोगों की परेशानियों को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश में भवन निर्माण और विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी।










