वाराणसी। योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अटल आवासीय विद्यालय अब केवल शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि सपनों को साकार करने का मंच बनती जा रही है। इसी कड़ी में वाराणसी के करसड़ा स्थित अटल आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले निर्माण श्रमिकों के दो बच्चे शैक्षणिक भ्रमण पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पहुंचे, जहां उन्होंने वैज्ञानिकों से मुलाकात कर ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान के रहस्यों को करीब से जाना।
अटल आवासीय विद्यालय के छात्र श्रेयांश विश्वकर्मा और छात्रा अपर्णा का चयन इसरो भ्रमण के लिए किया गया था। दोनों विद्यार्थी वर्तमान में कक्षा सात में अध्ययनरत हैं। इनका चयन कक्षा छह में गणित और विज्ञान विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हुआ। दोनों छात्र आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने इसरो की कार्यप्रणाली, उपग्रह प्रक्षेपण और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली।
विद्यालय के प्रधानाचार्य सत्येंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि यह शैक्षणिक भ्रमण बच्चों के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा। इस दौरान विद्यार्थियों ने न केवल इसरो के वैज्ञानिकों से संवाद किया, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के विभिन्न पहलुओं को भी समझा। इस यात्रा के दौरान बच्चे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भी भ्रमण करेंगे, जिनमें महाबलीपुरम मंदिर, संग्रहालय, समुद्री तट और चेन्नई के प्रमुख स्थल शामिल हैं।
वाराणसी क्षेत्र के उपश्रमायुक्त डॉ. महेश कुमार पांडेय ने बताया कि दोनों विद्यार्थी लखनऊ से हवाई यात्रा के माध्यम से इसरो पहुंचे। 5 से 7 फरवरी तक चलने वाले तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण में बच्चों को विज्ञान की दुनिया से रूबरू होने का अवसर मिला। इससे पहले अटल आवासीय विद्यालय की कक्षा सात की छात्रा श्वेता सत्ते भी इसरो का भ्रमण कर चुकी हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा सभी मंडल मुख्यालयों में संचालित किए जा रहे अटल आवासीय विद्यालयों में निर्माण श्रमिकों, कोरोना काल में निराश्रित बच्चों और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र विद्यार्थियों को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। वाराणसी के अटल आवासीय विद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, सीबीएसई आधारित पाठ्यक्रम, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर व एस्ट्रोनॉमी लैब, खेल सुविधाएं, शुद्ध पेयजल, भोजन, यूनिफॉर्म, किताबें और नोटबुक जैसी सभी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं।
श्रेयांश के पिता संतोष विश्वकर्मा ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पास बेटे को पढ़ाने के साधन नहीं थे, लेकिन सरकार की इस योजना ने उनके परिवार की कई पीढ़ियों का भविष्य संवार दिया। वहीं, अपर्णा के पिता मृत्युंजय सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने उनकी बेटी को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने का अवसर दिया और आज वह इसरो तक पहुंची है, जो कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
अटल आवासीय विद्यालय की यह पहल साबित कर रही है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो साधारण परिवारों के बच्चे भी असाधारण मुकाम हासिल कर सकते हैं।










