नई दिल्ली। यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया। साथ ही शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि इन याचिकाओं को पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ा जाए और सभी पर एक साथ सुनवाई की जाए।
देशभर में इन नियमों को लेकर जारी विरोध और कानूनी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अहम माना जा रहा है।
याचिकाओं में क्या है आपत्ति?
याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया है कि नए नियम सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और उनके समानता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। मुख्य विवाद इस बात को लेकर है कि नए नियमों में ‘कास्ट-बेस्ड डिस्क्रिमिनेशन’ की परिभाषा केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग तक सीमित कर दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सामान्य वर्ग के छात्र भी भेदभाव का सामना कर सकते हैं, इसलिए उन्हें भी समान संरक्षण मिलना चाहिए।
पहले भी लग चुकी है रोक
गौरतलब है कि 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने उस समय टिप्पणी की थी कि नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है और इससे समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कोर्ट ने फिलहाल पुराने नियम लागू रखने के निर्देश दिए थे और केंद्र व यूजीसी को नोटिस जारी कर विशेषज्ञ समिति बनाकर दोबारा समीक्षा करने का सुझाव भी दिया था।
देशभर में हो चुका है विरोध
इन नियमों के खिलाफ कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने प्रदर्शन किया है। विरोध करने वाले छात्रों का कहना है कि नई व्यवस्था सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को कमजोर करती है और इससे असंतुलित ढांचा तैयार होता है। वहीं यूजीसी और केंद्र सरकार का पक्ष है कि इन नियमों का उद्देश्य कैंपस में भेदभाव को समाप्त करना और अधिक समावेशी माहौल तैयार करना है।
अब सभी याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट का अंतिम रुख इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।










