बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने संत प्रेमानंद महाराज के समर्थन में खुलकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद जी के बयानों से मचा विरोध यह दिखाता है कि आज भी बहुत से लोगों को “कड़वी सच्चाई” हजम नहीं होती। शुक्रवार को छतरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में शास्त्री बोले, “उस दिन से मेरे मन में यह बात बैठ गई कि इस देश में सच कहना सबसे कठिन कार्य है।”
“हर कोई बुरा नहीं होता, लेकिन कुछ तो होते हैं”
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हर स्त्री बुरी नहीं होती, हर मजहब में लोग बुरे नहीं होते, लेकिन कुछ अपवाद हर जगह होते हैं। यह सच्चाई है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक बयान को पूरी जाति, मजहब या समुदाय से जोड़कर देखना सही नहीं है।
“समाज को देखने का हर किसी का नजरिया होता है”
शास्त्री ने आगे कहा कि जो लोग सनातन धर्म की भावना को समझते हैं, उन्हें हमारी बातें सही लगती हैं। लेकिन जो लोग इससे सहमत नहीं हैं, उन्हें हम विरोधी नजर आते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सब व्यक्तिगत नजरिए की बात है।
प्रेमानंद महाराज का विवादित बयान
बता दें कि कुछ समय पहले संत प्रेमानंद महाराज ने एक बयान में कहा था कि आजकल 100 में से मुश्किल से 2-4 लड़कियां ही पवित्र जीवन जी रही हैं, बाकी प्रेम-संबंधों में उलझी हुई हैं। इस बयान के बाद काफी विवाद खड़ा हो गया।
“हम बिना बात चुभा भी देते हैं”
धीरेंद्र शास्त्री ने मजाकिया लहजे में कहा, “लोगों को लगता है हम थोड़े उपद्रवी किस्म के आदमी हैं। बिना खुजली वाले को भी खाज कर देते हैं। हम जो बात है, वो सीधी-साफ कह देते हैं। शायद यही बात लोगों को चुभती है।”
“जातिवाद नहीं, राष्ट्रवाद चाहिए”
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने विचार साफ़ करते हुए कहा, “राजनेता जब जातियों के नाम पर राजनीति करते हैं, तो हमें बुरा लगता है। हम जातिवाद के सख्त खिलाफ हैं और राष्ट्रवाद के पक्षधर हैं। यही बात भी शायद कुछ लोगों को नागवार गुजरती है।”










