नई दिल्ली। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गुरुवार को 48 पैसे गिरकर 88.70 (अस्थायी) पर बंद हुआ। रुपया की यह कमजोरी मुख्य रूप से मजबूत अमेरिकी डॉलर, कमजोर घरेलू शेयर बाजारों, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण देखी गई।
फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया एफओएमसी बैठक में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती की, लेकिन चेयरमैन जेरोम पावेल के बयान ने बाजार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
क्यों कमजोर हो रहा है रुपया?
जेरोम पावेल ने कहा कि दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती की कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि अमेरिका में मुद्रास्फीति अभी भी लक्ष्य से ऊपर है और श्रम बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इस बयान के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर की मजबूती देखने को मिली, जिसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा।
घरेलू मोर्चे पर भी हालात रुपये के अनुकूल नहीं रहे। तेल विपणन कंपनियों की डॉलर खरीद, विदेशी पूंजी की निकासी और कमजोर शेयर बाजारों ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 88.37 पर खुला और कारोबार के दौरान 88.74 के निचले स्तर तक पहुंच गया।
आगे भी रह सकता है दबाव
बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 88.22 पर बंद हुआ था।
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में भी रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
मिराए एसेट शेयरखान के वरिष्ठ विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, मजबूत डॉलर, कमजोर घरेलू बाजार और फेड की सख्त नीति रुपये को और नीचे खींच सकती है।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार का हाल
इस बीच, डॉलर इंडेक्स मामूली रूप से 0.09 प्रतिशत गिरकर 99.12 पर पहुंच गया।
वहीं, ब्रेंट क्रूड ऑयल में 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसकी कीमत घटकर 64.50 डॉलर प्रति बैरल रह गई।
घरेलू शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली —
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सेंसेक्स 592 अंक गिरकर 84,404 पर बंद हुआ।
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निफ्टी 176 अंक टूटकर 25,878 पर आ गया।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को 2,540 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जिससे बाजार और रुपये दोनों पर दबाव और बढ़ गया।










