चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ का असर उत्तर प्रदेश में साफ तौर पर दिखने लगा है। पिछले दो दिनों से कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है। वाराणसी में बीते 30 घंटे से रिमझिम बारिश का सिलसिला जारी है, वहीं लखनऊ में घने बादलों ने सूरज को तीसरे दिन भी नहीं निकलने दिया। प्रयागराज, बलिया, गोंडा, अयोध्या, जौनपुर और आजमगढ़ समेत करीब 10 जिलों में शुक्रवार सुबह से ही रुक-रुककर बारिश हो रही है।
बारिश के साथ सर्द हवाओं ने ठंड बढ़ा दी है। सड़क पर निकलने वाले लोग जैकेट और गर्म कपड़ों में नजर आ रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे रेनकोट और छाते लेकर निकले। लगातार बारिश के कारण कई जगहों पर सड़कों पर पानी भर गया और वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
18 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार को राज्य के 18 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ अब कमजोर होकर लो-प्रेशर सिस्टम में बदल गया है, लेकिन इसका असर 1 नवंबर तक देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने पूर्वांचल के जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।
इन जिलों में अलर्ट जारी:
सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, जौनपुर, वाराणसी, संत रविदास नगर (भदोही), गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर और अंबेडकर नगर।
धान की फसल को भारी नुकसान
लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जिलों में धान की फसल कटने को तैयार है, तो कहीं कटकर खेतों में सूखने के लिए रखी गई थी। ऐसे में तेज हवा और बारिश से खड़ी फसलें गिर गई हैं, जबकि कटी हुई फसल भीग जाने से खराब होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों को डर है कि इससे धान के दानों में फफूंद लग सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों के नुकसान का संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित जिलों में सर्वे कराकर नुकसान की रिपोर्ट तैयार करें और पात्र किसानों को शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
गेहूं और रबी फसलों के लिए अनुकूल मौसम
हालांकि इस बारिश से जहां धान की फसल को नुकसान हुआ है, वहीं रबी फसलों के लिए मौसम अनुकूल बन गया है। बारिश के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी आ गई है, जिससे गेहूं, चना, मसूर, मटर और सरसों की बुआई के लिए यह सही समय माना जा रहा है। किसानों के अनुसार, बिना अतिरिक्त सिंचाई के अब जोताई और बुआई आसानी से की जा सकेगी।










