वाराणसी। शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयासों के बावजूद नगर निगम वाराणसी को दो प्रमुख संस्थानों- पूर्वोत्तर रेलवे और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की अनदेखी के कारण फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। वरुणापार क्षेत्र और संकट मोचन-साकेत नगर जैसे इलाकों में जलभराव की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है।
रेलवे नाला बना परेशानी का कारण
फुलवरिया क्षेत्र स्थित नुरुद्दीन शहीद मजार के पास जल निकासी की जिम्मेदारी भले ही नगर निगम की हो, लेकिन वहां का नाला रेलवे के अधीन आता है। नगर निगम ने अपनी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी नालों की समय पर सफाई कराई है, लेकिन रेलवे की लापरवाही के चलते उसका नाला पूरी तरह जाम होकर ओवरफ्लो कर रहा है।
नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने पूर्वोत्तर रेलवे को पत्र लिखकर नाले की तत्काल सफाई कराने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि, यदि रेलवे अपने अधीन नाले की सफाई कर देता है, तो इस क्षेत्र की जल निकासी समस्या का स्थायी समाधान संभव है।”
बीएचयू की जल निकासी व्यवस्था बनी मुसीबत
वहीं दूसरी ओर, बीएचयू परिसर से बहने वाला पानी साकेत नगर और संकट मोचन क्षेत्र के लिए सिरदर्द बन गया है। बीएचयू द्वारा अपनी जल निकासी की समुचित व्यवस्था न करने के कारण संकट मोचन से सुंदरपुर तक की सड़क पूरी तरह जलमग्न हो जाती है। इसके कारण स्थानीय लोगों के घरों में पानी घुस जाता है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
नगर निगम द्वारा राहत के लिए पंपिंग व्यवस्था की जाती है, लेकिन अत्यधिक पानी के कारण हालात काबू में नहीं आ पाते।
नगर आयुक्त का कहना है कि, बीएचयू को अपने परिसर की जल निकासी के लिए नई पाइपलाइन डालनी चाहिए और पानी की दिशा किसी अन्य मार्ग पर डायवर्ट करने की योजना बनानी चाहिए।”
स्थानीय लोग परेशान, निगम की कोशिशें बेअसर
नरियां वार्ड, साकेत नगर और संकट मोचन मार्ग के निवासी बारिश के मौसम में हर साल इसी समस्या से जूझते हैं। लोगों का कहना है कि बिना रेलवे और बीएचयू के सहयोग के, नगर निगम की कोशिशें अधूरी साबित हो रही हैं।
अब देखना होगा कि क्या रेलवे और बीएचयू अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभाते हैं या नगर निगम को अकेले ही इस जलजमाव से निपटना होगा।










