उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों के बीच उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज होने के बाद समय पर बिजली बहाल न करने के मामले में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की दो सदस्यीय पीठ ने यह आदेश जारी करते हुए जुर्माने की राशि 15 दिनों के भीतर जमा कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही UPPCL के प्रबंध निदेशक से इस मामले में विस्तृत जवाब भी मांगा गया है।
मार्च-अप्रैल में लाखों उपभोक्ता हुए थे प्रभावित
मार्च 2026 में बिजली विभाग ने कथित तौर पर लाखों स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिया था। इसके बाद बैलेंस माइनस होते ही प्रदेशभर में करीब 5 लाख घरों की बिजली एक साथ कट गई थी।
उपभोक्ताओं ने मीटर रिचार्ज तो करा लिया, लेकिन बड़ी संख्या में घरों में बिजली सप्लाई बहाल होने में कई घंटे से लेकर कई दिन और कुछ मामलों में 15 दिन तक का समय लग गया। इसको लेकर मार्च और अप्रैल के दौरान प्रदेशभर में भारी विरोध और नाराजगी देखने को मिली थी।
आयोग ने माना गंभीर लापरवाही
इस मामले को लेकर उपभोक्ता परिषद ने आयोग में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में उपभोक्ता सेवाओं के मानकों का पालन नहीं किया गया।
आयोग ने कहा कि नियमानुसार रिचार्ज के दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल हो जानी चाहिए थी, लेकिन बिजली कंपनियां इस मानक पर खरा उतरने में विफल रहीं। इससे उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा।
40 लाख से अधिक उपभोक्ताओं की बिजली हुई थी बंद
आयोग के आदेश के अनुसार 13 मार्च से 10 अप्रैल के बीच 16 दिनों में कुल 40 लाख 27 हजार 307 उपभोक्ताओं की बिजली काटी गई थी।
इनमें से:
- 18.78 लाख उपभोक्ताओं की बिजली आधे घंटे के भीतर बहाल हो गई।
- 22.21 लाख उपभोक्ताओं की बिजली दो घंटे के भीतर जोड़ दी गई।
- जबकि 1.93 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को दो घंटे से लेकर कई दिनों तक बिजली बहाल होने का इंतजार करना पड़ा।
आयोग ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली में रिचार्ज के बाद बिजली आपूर्ति तत्काल शुरू हो जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह तकनीकी खामी और प्रबंधन स्तर की गंभीर कमी को दर्शाता है।
आयोग ने तकनीकी खामियों की जांच के दिए निर्देश
विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 और 57 के तहत आयोग ने प्रति उल्लंघन 1 लाख रुपये तथा देरी के प्रत्येक दिन के लिए 6 हजार रुपये के हिसाब से कुल 7 लाख 18 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पूरे मामले का “रूट कॉज एनालिसिस” किया जाना चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि तकनीकी खामियां कहां थीं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।
आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बिजली विभाग को तत्काल तकनीकी कमियों को दूर करना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को भविष्य में ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।










