सरकार कर सकती है SIM बाइंडिंग के नियम में बदलाव! इन ऐप्स को मिल सकती है राहत

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित SIM बाइंडिंग नियमों को लेकर अब नया मोड़ सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इन नियमों में कुछ बदलाव या नरमी लाने पर विचार कर सकती है। दरअसल कई टेक कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इन नियमों को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद सरकार ने इस मुद्दे पर दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है।

क्या है SIM बाइंडिंग नियम

दिसंबर 2025 में दूरसंचार विभाग (DoT) ने नए नियम जारी किए थे। इन नियमों के अनुसार मैसेजिंग ऐप्स को उपयोगकर्ता के मोबाइल SIM से लगातार लिंक रहना जरूरी होगा। यानी जिस SIM नंबर से किसी ऐप पर अकाउंट बनाया गया है, उसी SIM वाले डिवाइस से उस ऐप का उपयोग किया जा सकेगा।

इसके अलावा नियमों में यह भी प्रावधान रखा गया था कि यदि कोई यूजर किसी मैसेजिंग ऐप को वेब या डेस्कटॉप वर्जन पर इस्तेमाल करता है, तो उसे हर छह घंटे में अपने आप लॉगआउट कर दिया जाएगा। सरकार का कहना था कि इससे सुरक्षा मजबूत होगी और गलत इस्तेमाल को रोका जा सकेगा।

टेक कंपनियों ने जताई आपत्ति

इन नियमों को लेकर कई टेक कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। कंपनियों का कहना है कि यह नियम केवल उन ऐप्स पर लागू होना चाहिए जो मुख्य रूप से मैसेजिंग सेवा प्रदान करते हैं।

कंपनियों के मुताबिक कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में मैसेजिंग केवल एक फीचर होता है, जबकि उनकी मुख्य सेवाएं कुछ और होती हैं। ऐसे में उन पर भी समान नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा।

कुछ प्लेटफॉर्म्स को मिल सकती है छूट

सूत्रों के अनुसार सरकार अब ऐसे प्लेटफॉर्म्स को छूट देने की संभावना पर विचार कर रही है जिनका मुख्य उद्देश्य केवल मैसेजिंग सेवा देना नहीं है। बताया जा रहा है कि कानून का उद्देश्य मुख्य रूप से कम्युनिकेशन ऐप्स को कवर करना था, इसलिए इस मामले में कुछ लचीलापन दिखाया जा सकता है। हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

कुछ कंपनियों ने शुरू की तैयारी

संभावित नियमों को देखते हुए कुछ मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स ने पहले ही तकनीकी बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। उदाहरण के तौर पर WhatsApp, JioChat और Arattai जैसे ऐप्स अपने यूजर अकाउंट को SIM से जोड़ने की तकनीकी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं।

क्यों लाया गया था यह नियम

SIM बाइंडिंग का प्रस्ताव Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत सामने आया था। इन नियमों के जरिए सरकार ने उन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी टेलीकॉम नियमों के दायरे में लाने की कोशिश की है जो मोबाइल नंबर के आधार पर यूजर की पहचान करते हैं।

नियमों के मुताबिक कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर उसी डिवाइस पर सेवा का उपयोग करे जिसमें रजिस्ट्रेशन के समय इस्तेमाल किया गया SIM मौजूद हो। इसके लिए कंपनियों को तकनीकी बदलाव लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया था।

साइबर धोखाधड़ी रोकने की कोशिश

सरकार का मानना है कि बिना SIM से लिंक किए गए डिवाइसों का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा सकता है। खासकर विदेशों से बैठकर किए जाने वाले टेलीकॉम फ्रॉड को रोकने के लिए इस तरह के नियम जरूरी बताए गए थे। इसी कारण वेब या डेस्कटॉप लॉगिन को सीमित समय तक ही सक्रिय रखने का प्रावधान रखा गया था।

उद्योग संगठनों ने जताई चिंता

टेक उद्योग से जुड़े कई संगठनों ने भी इन नियमों को लेकर चिंता व्यक्त की है। Broadband India Forum का कहना है कि इस तरह के नियम टेलीकॉम विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर भी हो सकते हैं और इससे कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं।

संगठन ने सुझाव दिया है कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए SIM-KYC प्रक्रिया को और सख्त किया जाए तथा टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए।

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Author: News Rastra

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