लखनऊ/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नए साल के मौके पर मंदिरों की सुरक्षा को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा जताई गई चिंता पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रयागराज में माघ मेले की तैयारियों का निरीक्षण करने पहुंचे मौर्य ने साफ शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव को मंदिरों की सुरक्षा को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि प्रदेश सरकार पूरी तरह सजग और सतर्क है।
मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को अपने कार्यकाल के दौरान धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को याद करना चाहिए। मौजूदा सरकार में मंदिरों, तीर्थ स्थलों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
युवाओं की सोच बदली, यह सरकार की उपलब्धि: मौर्य
अखिलेश यादव द्वारा नए साल पर मंदिरों में उमड़ी भीड़ को लेकर उठाए गए सवालों पर जवाब देते हुए मौर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों, खासकर युवाओं में जागरूकता बढ़ना बीजेपी सरकार की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पहले जहां नए साल पर लोग गोवा जैसे स्थानों पर जाकर अश्लीलता में समय बिताते थे, वहीं अब युवा और परिवारजन धार्मिक स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। यह बदलाव समाज के लिए सकारात्मक और स्वागतयोग्य है।
SIR अभियान पर बड़ा दावा, 2.89 करोड़ नाम हटने की बात
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं, क्योंकि संबंधित मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं आए। मौर्य ने स्पष्ट किया कि बीजेपी का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध करना है, ताकि केवल वास्तविक मतदाता ही लोकतंत्र की प्रक्रिया में भाग लें।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का मकसद फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाना है, जिससे किसी भी तरह की वोटिंग में गड़बड़ी न हो। मौर्य ने पार्टी कार्यकर्ताओं से हर बूथ पर सतर्क रहकर लोकतंत्र की रक्षा करने का आह्वान भी किया।
माघ मेले की तैयारियों का लिया जायजा
प्रयागराज दौरे के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने माघ मेले की तैयारियों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी और सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जाएंगी।
राजनीतिक तकरार तेज होने के संकेत
केशव प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच बयानबाजी का सिलसिला लगातार जारी है। एक ओर बीजेपी मतदाता सूची की शुद्धता और सुशासन की बात कर रही है, तो वहीं सपा चुनाव आयोग और सरकार पर सवाल उठा रही है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश की सियासत में यह जुबानी जंग और तेज होने के संकेत दे रही है।










