काशी के मणिकर्णिका घाट पर महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा और अन्य प्राचीन संरचनाओं को क्षति पहुंचाए जाने के आरोपों ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने मंगलवार को संसद भवन के बाहर प्रदर्शन कर इसे काशी की प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत पर सीधा हमला बताया।
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि मणिकर्णिका घाट पर वर्षों से स्थापित महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा और अन्य मूर्तियों को विकास के नाम पर तोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि काशी की गलियां, मंदिर और परंपराएं उसकी पहचान हैं, जिन्हें धीरे-धीरे नष्ट किया जा रहा है।
राम गोपाल यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं वाराणसी से सांसद हैं, इसके बावजूद काशी की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। बनारस की जनता कभी नहीं चाहती कि ऐसा कोई बदलाव हो, जिससे उसकी ऐतिहासिक पहचान मिट जाए।
सीएम योगी का पलटवार: AI वीडियो से बदनाम करने की साजिश
इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा और कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित है और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो AI से तैयार किया गया फर्जी कंटेंट है।
सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस काशी को बदनाम करने की साजिश कर रही है। प्रतिमा को विधिवत संरक्षित किया गया है और पुनर्निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उसे पहले से भी बेहतर स्वरूप में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने AI के जरिए झूठे वीडियो बनाने वालों को सख्त चेतावनी भी दी।
फेसबुक लाइव करने वाले साधु का दावा
विवाद को और हवा तब मिली जब पागल बाबा नामक साधु ने फेसबुक लाइव के जरिए दावा किया कि उनके सामने मणिकर्णिका घाट की प्राचीन मणि और उससे जुड़ी संरचना तोड़ी जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने पर ठेकेदार ने उन्हें वहां से भगा दिया।
प्रशासन का पक्ष: सभी मूर्तियां सुरक्षित
वाराणसी के जिलाधिकारी सतेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण कार्य के दौरान प्रभावित हुई सभी कलाकृतियों और मूर्तियों को संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित स्थान पर संरक्षित किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को निराधार बताया और लोगों से केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।
क्या है मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास योजना
मणिकर्णिका महाश्मशान घाट का पुनर्विकास CSR फंड से 18 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। करीब 29,350 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य चल रहा है। बाढ़ से सुरक्षा के लिए 15–20 मीटर गहराई तक पाइलिंग कराई गई है।
योजना के तहत 25 मीटर ऊंची चिमनी, पवित्र जलकुंड, प्रतीक्षा कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, दाह संस्कार प्लेटफॉर्म और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
होल्कर ट्रस्ट की आपत्ति
मणिकर्णिका घाट का निर्माण वर्ष 1771 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने कराया था। करीब ढाई सौ साल पुरानी इस विरासत को नुकसान पहुंचने पर होल्कर ट्रस्ट ने भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है।










