ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क इसलिए लगाया क्योंकि भारत ने रूस से तेल खरीदा। उन्होंने इसे कूटनीति नहीं, बल्कि एक “मसखरे की धौंस” बताया, जो वैश्विक व्यापार की बारीकियों को नहीं समझता।
ओवैसी ने कहा कि इस टैरिफ का सीधा असर भारतीय निर्यातकों, MSMEs और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ेगा। इससे सप्लाई चेन में रुकावट आएगी, विदेशी निवेश (FDI) प्रभावित होगा और रोजगार के अवसर कम होंगे। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अब मोदी सरकार के ’56 इंच के सीने’ वाले दावे कहां हैं? ओवैसी ने कहा कि पिछली बार जब उन्होंने सवाल उठाया था तो पूछा था कि अगर ट्रंप 56 प्रतिशत शुल्क लगाएंगे, तब मोदी जी क्या करेंगे? अब ट्रंप 50% पर रुक गए हैं – शायद वो हमारे ‘नॉन-बायोलॉजिकल’ प्रधानमंत्री से डर गए हों?
ओवैसी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बेचकर सरकार ने अपने अरबपति दोस्तों की तिजोरियां भर दीं?
अमेरिका ने लगाया भारी टैरिफ
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयात पर पहले ही 25% शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जिसका पहला चरण 7 अगस्त 2025 से लागू हो गया। लेकिन इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर और 25% शुल्क जोड़ दिया।
इस तरह भारत पर कुल 50% शुल्क लागू हो गया है, जो अमेरिका द्वारा किसी भी देश पर लगाया गया अब तक का सबसे अधिक शुल्क है। नया शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी होगा। ट्रंप प्रशासन ने यह टैरिफ वैश्विक व्यापार संतुलन और अमेरिका के हितों की रक्षा के नाम पर लगाया है।










