नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में ‘कर्तव्य भवन’ का भव्य उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने इसे एक साधारण इमारत नहीं, बल्कि “देशवासियों के सपनों को साकार करने की तपोभूमि” करार दिया।
जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा,“ये केवल ईंट-पत्थर के ढांचे नहीं हैं, बल्कि इन्हीं भवनों में अमृतकाल की नीतियां बनेंगी, महत्वपूर्ण फैसले होंगे और देश की दिशा तय होगी।”
सिर्फ इमारत नहीं, लोकतंत्र की आत्मा का प्रतीक
पीएम मोदी ने कहा कि ‘कर्तव्य भवन’ का नाम केवल एक शब्द भर नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार को अलग-अलग मंत्रालयों के लिए किराए पर कार्यालय लेने में हर साल करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब ये भवन उन सभी को एक ही छत के नीचे ले आएगा।
उन्होंने कहा, “कर्तव्य पथ और कर्तव्य भवन लोकतंत्र की उस भावना का विस्तार हैं जिसमें हर नागरिक का योगदान और जिम्मेदारी निहित है।”
फाइल नहीं, किसी की उम्मीद होती है
प्रधानमंत्री ने सरकारी कार्यप्रणाली में संवेदनशीलता लाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें फाइलों को लेकर अपना नजरिया बदलना होगा।”एक फाइल या शिकायत चाहे छोटी लगे, लेकिन उसी में किसी नागरिक की पूरी उम्मीद बसी हो सकती है। एक कागज कई ज़िंदगियों को छू सकता है।”
निर्माण में लगे इंजीनियरों और श्रमिकों को दी बधाई
पीएम मोदी ने इस मौके पर कर्तव्य भवन के निर्माण में लगे सभी इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स और मज़दूर साथियों का मंच से विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह भवन उनकी मेहनत और समर्पण का जीता-जागता उदाहरण है।
देश के हर कोने में विकास की रोशनी
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज देश के किसी भी हिस्से को विकास की धारा से अलग नहीं रखा गया है। “हमारा प्रयास है कि देश का हर नागरिक, चाहे वह कहीं भी हो, विकास की मुख्यधारा से जुड़ा रहे,” उन्होंने कहा।










