Sawan 2025: भगवान शिव की नगरी काशी अपने अलौकिक मंदिरों और रहस्यमय मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर गली और हर कोने में शिव का वास माना जाता है। इसी पवित्र नगरी में एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां शिवलिंग हर दिन तिल के आकार जितना बड़ा होता है। यह मंदिर न केवल अद्भुत है, बल्कि आस्था और विश्वास का मजबूत केंद्र भी है।
यह अनोखा शिव मंदिर कहां स्थित है?
तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर वाराणसी के पांडेय हवेली क्षेत्र में स्थित है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर बंगाली टोला स्कूल के पास है। इस मंदिर का उल्लेख पुराणों के काशी खंड में भी मिलता है। मंदिर में स्थित शिवलिंग की खासियत है कि वह प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है।
‘तिलभांडेश्वर’ क्यों कहलाते हैं बाबा?
कहा जाता है कि इस मंदिर में जो शिवलिंग स्थापित है, वह हर दिन तिल भर बढ़ता है। इसी विशेषता के कारण भोलेनाथ यहां ‘तिलभांडेश्वर महादेव’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। हालांकि आज तक यह पता नहीं चल पाया कि यह शिवलिंग जमीन के अंदर कितनी गहराई तक फैला है। खासतौर से यहां कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजा की जाती है। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं की 53 मूर्तियां भी हैं।
क्या है मंदिर की पौराणिक कथा?
मंदिर के पुजारी विनय पांडेय के अनुसार, इस स्थल की पवित्रता इतनी मानी जाती है कि यहां दर्शन मात्र से गंगासागर, प्रयागराज संगम और दशाश्वमेध घाट पर स्नान के बराबर पुण्य मिलता है। मान्यता है कि महर्षि विभांडक ने इस स्थान को अपनी तपस्या के लिए चुना था। उस समय इस क्षेत्र में तिल की खेती होती थी।
एक दिन जब वह ध्यानमग्न थे, तब भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और कहा कि यहां उनका दिव्य स्वरूप प्रकट होगा, जो प्रतिदिन तिल जितना बढ़ेगा। पहले ग्रामीणों को इस पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब खुदाई के दौरान शिवलिंग प्रकट हुआ, तो सभी ने इसे चमत्कार माना और यहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई।
शिवलिंग के बढ़ने की भविष्यवाणी
पुजारी के अनुसार, भगवान शिव ने महर्षि विभांडक को स्वप्न में दर्शन देकर यह बताया था कि यह शिवलिंग कलयुग के अंत तक तिल के बराबर बढ़ता रहेगा। इस स्वप्न के बाद ही ऋषि ने गांववालों को इसकी जानकारी दी, और तब से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया।
सच्ची श्रद्धा से पूरी होती है मनोकामना
यहां आने वाले भक्तों का विश्वास है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से अपनी प्रार्थना बाबा तिलभांडेश्वर के सामने रखता है, उसकी हर इच्छा भगवान शिव पूरी करते हैं। यही कारण है कि श्रावण मास में यहां भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं और भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं।










