गौ-वंश वध और ‘वेतन बनाम वैराग्य’ पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का योगी सरकार पर तीखा प्रहार, बोले – प्रदेश की तथाकथित हिंदू सरकार…

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश में चल रहे 40 दिवसीय ‘उप्र राज्यमाता अभियान’ के 11वें दिन परमाराध्य उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’ ने योगी सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल खड़े किए। काशी स्थित श्री विद्यामठ में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने प्रदेश में बढ़ते मांस उत्पादन, वधशालाओं को मिल रहे सरकारी संरक्षण और संन्यासी परंपरा से जुड़े ‘वेतन बनाम वैराग्य’ के मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि प्रदेश की तथाकथित हिंदू सरकार अपने आचरण से हिंदू मूल्यों का पालन करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न केवल पशु वध को बढ़ावा दिया है, बल्कि मांस उद्योग को उद्योग का दर्जा देकर सब्सिडी और सरकारी संरक्षण भी प्रदान किया है।

मांस उत्पादन पर आंकड़ों के जरिए हमला

शंकराचार्य ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का मांस उत्पादन लगभग 7.5 लाख टन था, जो वर्तमान में बढ़कर 13 लाख टन से अधिक हो गया है। उनके अनुसार वधशालाओं की संख्या कागजों पर भले ही कम हुई हो, लेकिन पशु वध की गति और मात्रा में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने दावा किया कि बीते नौ वर्षों में प्रदेश में 16 करोड़ से अधिक पशुओं का वध हुआ है, जिनमें करीब 4 करोड़ भैंस वंश के पशु शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतने बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा की आवाजें एक ‘योगी’ मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचतीं।

बजट और सब्सिडी पर भी सवाल

जगद्गुरु शंकराचार्य ने केंद्रीय बजट 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि मांस निर्यातकों को 3 प्रतिशत अतिरिक्त ड्यूटी-फ्री छूट देना सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन गतिविधियों को पहले अपराध माना जाता था, उन्हें अब उद्योग का दर्जा देकर 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है, जो 5 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।

‘वेतन बनाम वैराग्य’ का मुद्दा

पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य जी ने शास्त्रीय दृष्टि से भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि संन्यासी परंपरा में वेतन को ‘विष’ माना गया है, जबकि मुख्यमंत्री उसी राजकोष से वेतन और सुविधाएं ले रहे हैं, जो हिंसक गतिविधियों से प्राप्त राजस्व से भरा जा रहा है। उन्होंने इसे धार्मिक और नैतिक दृष्टि से गंभीर विरोधाभास बताया।

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Author: News Rastra

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