ट्रंप को लगा तगड़ा झटका! अमेरिकी ट्रेड कोर्ट ने टैरिफ रिफंड करने का दिया आदेश

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उन कंपनियों को टैरिफ (आयात शुल्क) की राशि वापस करने का रास्ता साफ कर दिया है, जिन्होंने पिछले साल लगाए गए शुल्क का भुगतान किया था।

दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन टैरिफ को गैरकानूनी करार दे चुका है। इसके बाद अब अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन को निर्देश दिया है कि वे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्क की रकम संबंधित कंपनियों को वापस करें।

कंपनियों को मिलेगा रिफंड का अधिकार

अदालत के फैसले के अनुसार, जिन कंपनियों ने IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ का भुगतान किया था, उन्हें रिफंड पाने का अधिकार है। जज रिचर्ड ईटन ने अपने फैसले में कहा कि जिन आयातकों की एंट्रीज IEEPA ड्यूटी के तहत थीं, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ लेने के पात्र हैं।

यह फैसला टेनेसी की फिल्ट्रेशन कंपनी Atmus Filtration द्वारा दायर मामले में आया है। हालांकि जज ने स्पष्ट किया कि टैरिफ रिफंड से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई वही करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को बताया था गैरकानूनी

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने फरवरी में 6-3 के बहुमत से ट्रंप द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ को अवैध करार दिया था। कोर्ट का कहना था कि IEEPA कानून राष्ट्रपति को इस तरह के टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।

ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल अप्रैल में “लिबरेशन डे” टैरिफ लागू किए थे। इन टैरिफ की दरें 10 प्रतिशत से शुरू होकर 50 प्रतिशत तक थीं और इनमें मेक्सिको, कनाडा और चीन जैसे देशों पर अलग-अलग शुल्क लगाए गए थे। इनसे अमेरिकी सरकार को करीब 130 अरब डॉलर का राजस्व मिला था।

हजारों मुकदमों की संभावना

हालांकि टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे सरकार के सामने हजारों मुकदमे आ सकते हैं। कई बड़ी कंपनियां जैसे FedEx पहले ही पूर्ण रिफंड की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी हैं।

छोटे व्यवसायों के संगठन We Pay the Tariffs के प्रतिनिधि डैन एंथनी ने इसे छोटे व्यापारियों की “बड़ी जीत” बताया है। उनका कहना है कि अमेरिकी छोटे कारोबार लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रहे थे और उन्हें जल्द व स्वतः रिफंड मिलना चाहिए। अनुमान है कि कुल रिफंड की राशि 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

नए टैरिफ लगाने की तैयारी

इस बीच ट्रंप प्रशासन नए टैरिफ लगाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि वैश्विक टैरिफ दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत की जा सकती है। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए IEEPA टैरिफ की जगह ले सकती है।

बेसेंट के अनुसार 150 दिनों के अध्ययन के बाद सेक्शन 301 और 232 जैसे अन्य कानूनों के जरिए टैरिफ को फिर से पुराने स्तर पर लाया जा सकता है।

भारत पर भी पड़ सकता है असर

इस फैसले का असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी पड़ सकता है। पहले भारत पर “लिबरेशन डे” के तहत 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था और बाद में रूसी तेल खरीद को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिया गया था, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।

हालांकि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए एक ट्रेड फ्रेमवर्क समझौते के बाद इसे घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही गई है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी आयात कर नीति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह फैसला ट्रंप की आर्थिक नीतियों और वैश्विक व्यापार पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

News Rastra
Author: News Rastra

Leave a Comment

और पढ़ें