वाराणसी पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े संगठित गिरोह का खुलासा किया है। थाना रोहनिया और थाना सारनाथ की संयुक्त कार्रवाई में इस हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट से जुड़े पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है।
93,750 शीशियों की बड़ी बरामदगी
पुलिस के अनुसार, 19 नवंबर 2025 को रोहनिया थाना क्षेत्र के भदवर स्थित एक गोदाम से 93,750 शीशियां कोडीन युक्त कफ सिरप (PHENSEDYL और ESKUF) बरामद की गई थीं। मौके से आजाद जायसवाल को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क शुभम जायसवाल के इशारे पर संचालित हो रहा था। सिरप को गाजियाबाद से फर्जी बिलों के जरिए मंगाकर बांग्लादेश भेजा जाता था, जहां इसकी कीमत भारत के मुकाबले करीब दस गुना अधिक वसूली जाती थी।
फर्जी फार्मा कंपनियों से हो रही थी मनी लॉन्ड्रिंग
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि तस्करी से अर्जित करोड़ों रुपये को वैध दिखाने के लिए सिंह मेडिकोज, अलउक्बा मेडिकल एजेंसी और एसपी फार्मा जैसी फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं। इन कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर हवाला के जरिए आया नकद पैसा जमा किया जाता और फिर RTGS के माध्यम से शुभम जायसवाल की फर्म ‘शैली ट्रेडर्स’ में ट्रांसफर कर दिया जाता था। अब तक पुलिस एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कर चुकी है।
रोहनिया और सारनाथ से गिरफ्तारी
इस मामले में रोहनिया पुलिस ने स्वपलिन केसरी, दिनेश कुमार यादव और आशीष यादव को गिरफ्तार किया है। वहीं, सारनाथ पुलिस ने विष्णु कुमार पाण्डेय और लोकेश अग्रवाल को हिरासत में लिया। आरोपियों के पास से चेकबुक, फर्जी बिल, लैपटॉप, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और फार्मा फर्मों की मुहरें बरामद हुई हैं।
कोड वर्ड में चल रहा था कारोबार
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने कफ सिरप को “नीला” और मुनाफे को “पीला” (सोना) कहने का कोड बना रखा था। तस्करी से मिले पैसों को सोने में बदलकर पश्चिम बंगाल के रास्ते हवाला नेटवर्क से भारत में एडजस्ट किया जाता था।
पुलिस कमिश्नर वाराणसी के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई को एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और अवैध संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई जल्द की जाएगी।










