धान-आधारित खेती में सूक्ष्मजीव तकनीक को बढ़ावा देने के लिए इरी और भाकृअनुप-एनबीएआईएम में हुआ समझौता

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वाराणसी। धान उत्पादन को टिकाऊ, उत्पादक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (इरी) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के राष्ट्रीय कृषि-उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो (एनबीएआईएम), मऊ के बीच एक अहम सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह ऐतिहासिक समझौता इरी के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क), वाराणसी में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर एनबीएआईएम के निदेशक डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव और आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे। इस सहयोग का उद्देश्य भारत की धान-आधारित कृषि प्रणालियों में सूक्ष्मजीव तकनीकों को बढ़ावा देकर उपज बढ़ाना, मिट्टी की सेहत सुधारना और पर्यावरणीय प्रभावों को कम करना है।

क्या है साझेदारी का मकसद?

इस समझौते के तहत निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर काम होगा:

  • सूक्ष्मजीव-प्रतिक्रियाशील धान किस्मों का विकास

  • फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जैविक समाधान

  • किसानों और कृषि विस्तार कर्मियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

डॉ. सुधांशु सिंह ने इस साझेदारी को “विज्ञान को ज़मीन से जोड़ने की दिशा में नई शुरुआत” बताते हुए कहा कि इस पहल से जलवायु-स्मार्ट और पुनरुत्पादक कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

नवाचारों से जुड़ेगा किसान

एनबीएआईएम के निदेशक डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने कहा, “भारत में सूक्ष्मजीवों की ताकत को पूरी तरह से समझा नहीं गया है। इस साझेदारी के ज़रिए हम धान-आधारित क्षेत्रों के लिए ऐसी तकनीकों का विकास करेंगे, जो कम लागत पर अधिक लाभकारी साबित होंगी।” उन्होंने यह भी बताया कि यह समझौता उनके संस्थान के मिशन के अनुरूप है, जो मिट्टी स्वास्थ्य, पोषण प्रबंधन और कार्बन संरक्षण को बढ़ावा देता है।

व्यवहारिक समाधान पर फोकस

इरी की मानव संसाधन प्रमुख कार्ला लजारते ने कहा कि, “जलवायु परिवर्तन के कारण बदलती कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान और साझेदारियों की यह पहल ज़रूरी है। इससे किसानों को किफायती, व्यवहारिक और स्थानीय जरूरतों पर आधारित समाधान मिल सकेंगे।”

रणनीतिक सहयोग को मिलेगा बल

यह सहमति पत्र भाकृअनुप और इरी के बीच 1974 में हुए समझौते और 2023 में हस्ताक्षरित कार्य योजना का हिस्सा है। इसके अंतर्गत एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया जाएगा, जो परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी का कार्य देखेगा।

Ankita Yadav
Author: Ankita Yadav

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