वाराणसी में इस बार मां गंगा की आरती का समय बदल गया है। वजह है 7 सितंबर को लगने वाला साल का आखिरी चंद्रग्रहण। ग्रहण का सूतक काल रविवार दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से शुरू होगा। परंपरा के अनुसार सूतक काल में मंदिरों और घाटों पर पूजा-पाठ वर्जित रहता है। इसी कारण गंगा सेवा निधि ने नियमित शाम की गंगा आरती को आगे बढ़ाकर दोपहर 12 बजे कराने का निर्णय लिया है।
काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्य घाटों पर भी बदलाव
ग्रहण की वजह से काशी विश्वनाथ मंदिर में भी आरती और दर्शन के समय में बदलाव किया गया है। शहर के अन्य घाटों पर होने वाली आरतियां भी दिन में ही संपन्न की जाएंगी। शाम को मंदिरों के पट बंद रहेंगे और चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद परंपरा के अनुसार देव विग्रहों का स्नान कराया जाएगा, तभी दर्शन-पूजन फिर से शुरू होगा।
इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण
खगोल शास्त्रियों के मुताबिक, यह 2025 का आखिरी चंद्रग्रहण होगा, जिसे देशभर में देखा जा सकेगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल और ग्रहण के समय किसी भी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसी कारण गंगा सेवा निधि ने आरती का समय दोपहर में तय किया है।
34 साल में पांचवीं बार दिन में आरती
गंगा सेवा निधि से जुड़े सुशांत मिश्र के अनुसार, सुबह की गंगा आरती पहले की तरह सूर्योदय पर यानी प्रातः 8 बजे होगी। वहीं, ग्रहण को ध्यान में रखते हुए दोपहर की आरती पूरी परंपरा और विधि-विधान के साथ होगी। यह खास मौका है क्योंकि पिछले 34 वर्षों में यह सिर्फ पांचवीं बार है जब गंगा आरती दिन में हो रही है। इससे पहले 7 अगस्त 2017, 27 जुलाई 2018, 16 जुलाई 2019 और 28 अक्टूबर 2023 को भी चंद्रग्रहण के चलते दिन में आरती आयोजित की गई थी।
दशाश्वमेध घाट पर छत से होगी आरती
बाढ़ की वजह से इस बार गंगा आरती दशाश्वमेध घाट के नियमित स्थल की बजाय उसकी छत पर कराई जाएगी। आयोजकों का कहना है कि आरती का स्वरूप पूरी तरह वैसा ही रहेगा जैसा परंपरा में निर्धारित है।










