मध्य प्रदेश में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने प्रशासन से लेकर आम जनता तक को झकझोर कर रख दिया है। कफ सिरप ‘Coldrif’ के सेवन से अब तक 14 बच्चों की जान जा चुकी है, जिसके बाद राज्यभर में हड़कंप मच गया है। सबसे ज्यादा मामले छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र से सामने आए हैं, जहां अकेले 7 सितंबर से अब तक 10 बच्चों की मौत दर्ज की गई है।
जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है, Coldrif कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीले रसायन की 46.2% मात्रा पाई गई है, जो किडनी को पूरी तरह नष्ट कर देता है। इसके बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए Coldrif की बिक्री पर रोक लगा दी है।
डॉक्टर गिरफ्तार, कंपनी के खिलाफ FIR
शनिवार को परासिया थाने में डॉ. प्रवीण सोनी और Coldrif बनाने वाली कंपनी Sresun Pharmaceuticals के संचालकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। रिपोर्ट आने के कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने डॉ. सोनी को गिरफ्तार कर लिया। उन पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट की धारा 27(A) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 व 276 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जांच में पाया गया कि जिन बच्चों की मौत हुई, उनमें से अधिकांश को डॉ. सोनी ने यही कफ सिरप प्रिस्क्राइब किया था। परासिया सीएचसी के BMO अंकित सहलाम ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट की लैब में जांच के बाद यह सामने आया कि Coldrif सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की खतरनाक मात्रा मौजूद थी। यह रसायन आमतौर पर एंटी-फ्रीज और ब्रेक फ्लूइड में इस्तेमाल होता है, लेकिन इंसानी शरीर के लिए बेहद विषैला और घातक होता है। रिपोर्ट आने के बाद, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु सरकार ने इस दवा की बिक्री पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सतर्कता बरतते हुए देश के छह राज्यों में दवा फैक्ट्रियों की सघन जांच शुरू कर दी है।
CDSCO (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) ने 19 अन्य दवाओं के उत्पादन स्थलों पर जोखिम आधारित निरीक्षण भी प्रारंभ कर दिया है।
Nextro-DS की रिपोर्ट का इंतजार
छिंदवाड़ा के एसडीएम सौरभ कुमार यादव के अनुसार, Coldrif के साथ ही एक और कफ सिरप Nextro-DS पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था। Coldrif की रिपोर्ट आ चुकी है, लेकिन Nextro-DS की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है।
कैसे बनी सिरप बच्चों की मौत का कारण?
सितंबर की शुरुआत में परासिया और आसपास के गांवों में कई बच्चे सर्दी-खांसी की दवा लेने के बाद गंभीर बीमार पड़ने लगे।
उन्हें बुखार, उल्टी और पेशाब रुकने जैसे लक्षण दिखे। कुछ ही दिनों में 6 बच्चों की मौत हुई, जो बढ़कर 14 तक पहुंच गई। बायोप्सी और लैब टेस्ट में जहरीले तत्व डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मौजूदगी की पुष्टि हुई। राजस्थान से भी इस सिरप से 1-2 बच्चों की मौत की रिपोर्टें आई हैं।
जानिए किन मासूमों ने गंवाई जान
| नाम | उम्र | पता |
|---|---|---|
| दिव्यांश चंद्रवंशी | 7 वर्ष | डुड्डी |
| अदनान खान | 5 वर्ष | न्यूटन चिखली |
| हेतांश सोनी | 5 वर्ष | उमरेठ |
| उसैद | 4 वर्ष | परासिया |
| श्रेया यादव | 18 माह | परासिया |
| विकास यदुवंशी | 4 वर्ष | दीघावानी |
| योगिता विश्वकर्मा | 5 वर्ष | बोरिया |
| संध्या भोसोम | सवा साल | परासिया |
| चंचलेश यदुवंशी | — | गायगोहान |
| योजिता ढाकरे | 2 वर्ष | बडकुही |
| इसके अलावा चार अन्य बच्चों की मौत की भी पुष्टि हुई है। |
आगे की कार्रवाई और जांच
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डॉ. प्रवीण सोनी से पुलिस कर रही है गहन पूछताछ।
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Sresun Pharma की सप्लाई चेन और मालिकों पर शिकंजा कसने की तैयारी।
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केंद्र ने 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप्स पर चेतावनी जारी की।
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ICMR, NIV, AIIMS नागपुर और CDSCO की टीम ने संयुक्त जांच शुरू की है।
डॉक्टर निलंबित
मध्य प्रदेश के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। उन्हें जबलपुर स्थित क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं कार्यालय में अटैच किया गया है। आरोप है कि उन्होंने बच्चों के उपचार में गंभीर लापरवाही बरती, जिससे मासूमों की जान चली गई।










