वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र में रविवार को डीसीपी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने एक अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारा। इस कॉल सेंटर में टेली कॉलिंग जॉब के नाम पर लोगों से ठगी की जा रही थी। मौके से करीब 50 लोग मिले, जिनमें से अधिकांश खुद इस साइबर फ्रॉड के शिकार थे। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि इस रैकेट के दो मुख्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
एसीपी साइबर क्राइम ने बताया कि भारत सरकार के ‘प्रतिबिंब पोर्टल’ पर शिकायत दर्ज कराई गई थी कि सारनाथ क्षेत्र में आरआरएमवी नाम से फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। ठग बेरोजगार युवाओं को टेली कॉलिंग की नौकरी का झांसा देते थे और फिर “किट” के नाम पर उनसे 10 से 50 हजार रुपये तक वसूलते थे। इसके बाद उन्हीं पीड़ितों को मजबूर किया जाता था कि वे दूसरों को कॉल करके इसी तरह ठगी में शामिल हों।
छापेमारी के दौरान 50 से ज्यादा लोग मिले, जिनमें से ज्यादातर खुद ठगी का शिकार थे। पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क धीरे-धीरे कई जिलों में फैला हुआ था।
एसीपी साइबर क्राइम ने बताया कि इस पूरे गिरोह के दो मुख्य सरगना रवि और रविंद्रन फरार हैं। अधिकतर पीड़ित युवक-युवतियां बलिया, जौनपुर, बिहार और आसपास के जिलों के हैं, जो बेरोजगारी के कारण इस जाल में फंस गए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल है।
पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर इस नेटवर्क का पूरा खुलासा किया जाएगा।










