UGC एक्ट 2026 पर रोक के खिलाफ जनहित संकल्प पार्टी का विरोध, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

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वाराणसी। यूजीसी एक्ट 2026 पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने के बाद देशभर में असंतोष का माहौल है। इसी क्रम में शनिवार, 22 फरवरी 2026 को जनहित संकल्प पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए यूजीसी एक्ट 2026 को संसद में विधेयक के रूप में लाकर कानून बनाने और जातीय जनगणना कराने की मांग की।

 

ज्ञापन में कहा गया है कि देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पिछड़े वर्ग, दलित और दिव्यांग छात्रों के साथ वर्षों से जातीय भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे भेदभाव के कारण कई छात्र मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। पार्टी ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए इन्हें “संस्थागत हत्या” करार दिया।

ज्ञापन के अनुसार, यूजीसी के आंकड़ों में वर्ष 2019-20 के दौरान जातीय भेदभाव से जुड़ी 173 शिकायतें दर्ज थीं, जो चार वर्षों में बढ़कर 378 तक पहुंच गईं, यानी करीब 118 प्रतिशत की वृद्धि। हालांकि, पार्टी का कहना है कि यह केवल दर्ज मामलों की संख्या है, जबकि वास्तविकता में ऐसे हजारों मामले सामने तक नहीं आ पाते।

जनहित संकल्प पार्टी ने आरोप लगाया कि आज़ादी के 79 साल बाद भी उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों के साथ भेदभाव की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो देश के लिए बेहद शर्मनाक है। इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए भारत सरकार ने 12 जनवरी 2026 को यूजीसी एक्ट 2026 जारी किया था, लेकिन 29 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस पर रोक लगा दी गई।

पार्टी का कहना है कि इस रोक के बाद देशभर में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग अपने अधिकारों और न्याय के लिए आंदोलनरत हैं। साथ ही, ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना कराने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान में जारी जनगणना अधिसूचना में ओबीसी और सामान्य वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे ओबीसी समाज में गहरा रोष है।

मुख्य मांगें

  1. यूजीसी एक्ट 2026 को विधिवत संसद में विधेयक के रूप में पेश कर कानून बनाया जाए।
  2. आगामी जनगणना में जातीय जनगणना का स्पष्ट कॉलम जोड़ा जाए तथा ओबीसी और सामान्य वर्ग को अलग-अलग दर्शाया जाए।

पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे उत्पन्न होने वाले जनआंदोलन और परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी शासन, प्रशासन और सरकार की होगी।

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Author: News Rastra

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