नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को कोर्ट ने तीन अहम आदेश जारी करते हुए सभी राज्यों को सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर तुरंत कार्रवाई करें और हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करें।
पूरे देश में लागू होगा राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने दूसरे आदेश में कहा कि सड़कों और हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश अब पूरे देश में लागू होगा। सभी राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्रों से आवारा पशुओं को हटाकर उन्हें आश्रय स्थलों (शेल्टर होम्स) में रखें। कोर्ट ने नगर निगमों को निर्देश दिया कि वे पेट्रोलिंग टीम बनाएं, जो दिन-रात सड़कों की निगरानी करे। साथ ही, एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाए ताकि लोग आवारा पशुओं की सूचना दे सकें।
स्कूलों, अस्पतालों और बस अड्डों में नहीं रहेंगे आवारा कुत्ते
तीसरे आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसर, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की एंट्री रोकने के लिए बाड़बंदी और अन्य उपाय किए जाएं। इन कुत्तों का वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन कर उन्हें शेल्टर होम में रखा जाए। कोर्ट ने राज्यों को 8 सप्ताह की समय सीमा दी है, जिसके भीतर इन आदेशों को लागू करना होगा।
दिल्ली-एनसीआर से शुरू हुई थी कार्रवाई
गौरतलब है कि 11 अगस्त को जस्टिस जे. बी. पारडीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था। हालांकि, एनिमल लवर्स ने इस आदेश का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद मामला तीन जजों की बेंच को सौंपा गया। नई बेंच ने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि कुत्तों को स्टरलाइज और वैक्सिनेट कर उनके मूल इलाकों में वापस छोड़ा जाए।
राज्य सरकारों की लापरवाही पर नाराज हुआ कोर्ट
कोर्ट ने यह भी बताया कि 22 अगस्त को सुनवाई के दौरान सभी राज्यों से हलफनामा मांगा गया था, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी केवल दो राज्यों ने ही जवाब दाखिल किया। इस पर बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “क्या राज्यों के अधिकारी अखबार नहीं पढ़ते या सोशल मीडिया इस्तेमाल नहीं करते? देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं की खबरें रोज़ आ रही हैं, इसके बावजूद इतनी लापरवाही अस्वीकार्य है।”
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला केवल पशु कल्याण का नहीं, बल्कि जन सुरक्षा और देश की साख से जुड़ा है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि तय समय में आदेश लागू न करने पर राज्यों से जवाब तलब किया जाएगा।










