लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों से ठगी करने वाले डॉक्टरों पर अब गाज गिरने वाली है। स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए चेतावनी दी है कि जो भी डॉक्टर मरीजों को सादी पर्ची पर बाहर की महंगी ब्रांडेड दवाएँ लिखते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमित कुमार घोष ने साफ कहा है कि सरकारी अस्पतालों में यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की 200 से अधिक जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर भी कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएँ मिल रही हैं। बावजूद इसके, कुछ डॉक्टर सरकारी पर्ची पर कुछ दवाएँ लिखकर बाकी दवाओं के लिए सादी पर्ची थमा देते हैं, जिससे मरीजों को बाहर से महंगी दवाएँ खरीदनी पड़ती हैं।
15 नवंबर से शुरू होगा औचक निरीक्षण
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी घोषणा की है कि 15 नवंबर से प्रदेश भर के सभी जिलों में औचक निरीक्षण शुरू होगा। शासन स्तर की टीमें अचानक अस्पतालों का दौरा करेंगी। निरीक्षण के दौरान यदि कोई डॉक्टर OPD समय में अनुपस्थित पाया गया, तो उसके साथ-साथ संबंधित चिकित्सा अधीक्षक (MS) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) पर भी कार्रवाई की जाएगी।
अधीक्षकों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सुबह से दोपहर 2 बजे तक दिन में तीन बार अस्पताल परिसर का निरीक्षण करें, और किसी भी तरह की कमी मिलने पर तुरंत सुधार सुनिश्चित करें।
मरीजों को मिला शिकायत का अधिकार
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को भी सशक्त करते हुए कहा है कि यदि कोई डॉक्टर बाहर की दवा लिखता है, तो मरीज सीधे अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक या अधीक्षक से शिकायत कर सकता है। अगर वहां से कोई सुनवाई नहीं होती, तो महानिदेशक (स्वास्थ्य) को भी लिखित रूप में शिकायत भेजी जा सकती है।
सरकार का दावा है कि इस सख्ती के बाद न केवल मरीजों का आर्थिक शोषण रुकेगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।










