वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया। बजट में इनकम टैक्स को लेकर टैक्सपेयर्स को किसी बड़े राहत पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने टैक्स स्लैब, डिडक्शन या रिबेट में कोई बदलाव नहीं किया। इस वजह से आम टैक्सपेयर्स को थोड़ी निराशा जरूर हाथ लगी। हालांकि, सरकार ने टैक्स सिस्टम को आसान बनाने और रिटर्न फाइलिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं में कुछ अहम सुधारों का ऐलान किया है।
रिटर्न फाइलिंग की समय-सीमा बढ़ी
वित्त मंत्री ने बताया कि आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म भरने वाले व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई की अंतिम तारीख पहले की तरह ही बनी रहेगी। वहीं, नॉन-ऑडिट कैटेगरी में आने वाले बिजनेस और ट्रस्ट्स को अब रिटर्न फाइल करने के लिए 31 अगस्त तक का समय मिलेगा। इससे छोटे कारोबारियों और संस्थानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
रिवाइज्ड रिटर्न के लिए ज्यादा वक्त
बजट में रिवाइज्ड रिटर्न को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब टैक्सपेयर्स 31 दिसंबर की बजाय 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए मामूली फीस देनी होगी। पहले 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड रिटर्न बिना किसी शुल्क के फाइल किया जा सकता था। डेडलाइन बढ़ने से टैक्सपेयर्स को गलतियों को सुधारने का अतिरिक्त समय मिलेगा।
1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 आगामी 1 अप्रैल से लागू हो जाएगा। इसके तहत टैक्स के नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया जाएगा। नए नियमों के साथ नए आईटीआर फॉर्म भी जल्द नोटिफाई किए जाएंगे, जो पहले की तुलना में ज्यादा आसान होंगे। सरकार का मानना है कि इससे रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया सरल होगी और कंप्लायंस का बोझ कम होगा।
TCS और TDS में बदलाव
बजट में विदेशी लेनदेन को लेकर भी राहत दी गई है। विदेशी टूर प्रोग्राम पर लगने वाले TCS की दर घटाई गई है। वहीं, एलआरएस (LRS) के तहत शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर TCS घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा मैनपावर सप्लाई सर्विसेज को अब TDS के लिए कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट की श्रेणी में रखा जाएगा।
फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर के लिए वन टाइम स्कीम
सरकार ने यह भी ऐलान किया है कि कुछ खास टैक्सपेयर्स के लिए फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर की एक वन टाइम स्कीम लाई जाएगी। इसके तहत तय सीमा में विदेश में रखी गई ऐसी संपत्तियां, जिन्हें पहले घोषित नहीं किया गया है, उन्हें डिस्क्लोज करने का मौका मिलेगा।
कुल मिलाकर बजट में इनकम टैक्स को लेकर बड़े बदलाव तो नहीं किए गए, लेकिन रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान बनाने और कुछ दरों में राहत देकर टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की कोशिश जरूर की गई है।










