वाराणसी। गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी और नाविक के अपहरण के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद सभी आरोपियों को दोबारा जेल भेज दिया गया।
कोर्ट में डेढ़ घंटे चली बहस, फिर आया फैसला
यह सुनवाई Alok Kumar की अदालत में हुई, जहां सुबह करीब साढ़े 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस चली। कोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद करीब 6 पन्नों का आदेश जारी किया और जमानत याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने बताया गंभीर अपराध
वादी पक्ष के वकील Nityanand Rai के मुताबिक, अदालत ने साफ कहा कि यह कृत्य जानबूझकर किया गया था।
उन्होंने बताया कि घटना गंगा आरती के समय पंचगंगा घाट के पास हुई, जहां पूजा-पाठ चल रहा था। ऐसे समय में बीच धारा में इस तरह का कृत्य करना गंभीर अपराध माना गया।
कोर्ट का फैसला सुनते ही आरोपियों के परिजन भावुक हो गए। वहीं आरोपी भी गुमसुम नजर आए। इससे पहले भी सीजेएम कोर्ट आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर चुका था।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 16 मार्च को Varanasi में गंगा नदी के बीच एक नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी।
इस दौरान रोजेदारों को फल, मेवे के साथ चिकन बिरयानी परोसी गई और इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया।
वीडियो वायरल होते ही बढ़ा विवाद
वीडियो वायरल होने के बाद Bharatiya Janata Party और हिंदूवादी संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई।
इसके बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने महज 8 घंटे के भीतर 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
सभी आरोपी एक ही इलाके के
बताया जा रहा है कि सभी आरोपी मदनपुरा क्षेत्र के ताड़तल्ला इलाके के रहने वाले हैं और उनकी उम्र 19 से 25 साल के बीच है। कई आरोपी एक ही परिवार से जुड़े हुए हैं।
जांच और कार्रवाई जारी
फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है। इस घटना को लेकर कानून-व्यवस्था और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।










