नई दिल्ली। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकसभा में बिल का पारित न होना सरकार की हार नहीं, बल्कि देश की महिलाओं के अधिकारों का विरोध है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को सीधे महिला सशक्तिकरण से जोड़ते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक भूल है और यह महिलाओं को उनका हक देने से इनकार करने जैसा है।
बैठक में प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए पूछा कि यदि वे वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहते थे, तो पिछले 50 वर्षों में उन्होंने इस दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। उन्होंने इसे विपक्ष की नीयत पर सवाल खड़ा करने वाला मुद्दा बताया।
इस बीच, सूत्रों के अनुसार सरकार फिलहाल लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर सीधे आरक्षण लागू करने के लिए नया विधेयक लाने के पक्ष में नहीं है। विपक्ष और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की इस मांग को सरकार ने खारिज करते हुए इसे महज राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।
प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि इस मुद्दे को देश के गांव-गांव तक पहुंचाया जाए, ताकि जनता को यह बताया जा सके कि विपक्ष का रुख महिलाओं के प्रति नकारात्मक है। उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा कि वे लोगों के बीच जाकर इस विषय पर स्पष्ट संदेश दें।
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने यह भी चेतावनी दी कि महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने का राजनीतिक नुकसान विपक्ष को उठाना पड़ेगा। उनके मुताबिक, जनता इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और इसका असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।
साथ ही, प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर ‘बचाव की राजनीति’ करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विपक्ष अब अपने रुख को सही ठहराने और छिपाने की कोशिश कर रहा है, जिससे यह साफ होता है कि वे खुद अपने फैसले को लेकर असहज हैं।








