Pitru Paksha 2025 : इन जगहों पर भूलकर भी न करें श्राद्ध, वरना पितृ हो जाएंगे नाराज

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Pitru Paksha 2025 : हिंदू धर्म में भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलने वाले श्राद्ध पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि श्राद्ध कर्म हमेशा पवित्र और उचित स्थान पर ही करना चाहिए। कुछ स्थान ऐसे हैं जहां श्राद्ध करना वर्जित माना गया है, जबकि कुछ विशेष स्थानों पर इसे शुभ और फलदायी बताया गया है।

इन जगहों पर श्राद्ध करना वर्जित है

  1. देव स्थान – किसी मंदिर के अंदर, मंदिर परिसर या किसी भी देवभूमि पर श्राद्ध करना वर्जित है।

  2. अपवित्र भूमि – गंदी जगह, कांटेदार या बंजर भूमि, अथवा जहां लोग खुले में मल-मूत्र त्याग करते हों, वहां श्राद्ध नहीं करना चाहिए।

  3. दूसरों की भूमि – किसी अन्य की निजी भूमि पर श्राद्ध नहीं करना चाहिए। यदि करना पड़े तो भूस्वामी को किराया या दक्षिणा देना आवश्यक है।

  4. साधारण श्मशान – सामान्य श्मशान घाट पर श्राद्ध नहीं करना चाहिए। केवल वे श्मशान, जिन्हें शास्त्रों में तीर्थ का दर्जा प्राप्त है (जैसे उज्जैन का चक्रतीर्थ), वहां विशेष परिस्थितियों में श्राद्ध किया जा सकता है।

इन पवित्र स्थानों पर करें श्राद्ध

  1. नदी तट – पवित्र नदियों और संगम तट पर विधि-विधान से श्राद्ध करना अत्यंत शुभ माना गया है।

  2. तीर्थ स्थल – गया, नासिक, उज्जैन जैसे तीर्थ स्थलों पर श्राद्ध का विशेष महत्व बताया गया है।

  3. समुद्र तट – समुद्र किनारे भी श्राद्ध किया जा सकता है, लेकिन यह स्थान पवित्र होना चाहिए।

  4. घर – घर पर श्राद्ध करना सबसे उत्तम माना गया है। विशेष कर्म के लिए ही अन्य स्थानों का चयन करें।

  5. बरगद का पेड़ – वट वृक्ष के नीचे श्राद्ध करना भी फलदायी है, बशर्ते वहां देवस्थान न हो।

  6. गोशाला – ऐसी गोशाला, जहां बैल न बंधे हों, वहां भूमि को शुद्ध करके श्राद्ध किया जा सकता है।

  7. पर्वत शिखर – पवित्र पर्वतों पर देवस्थान को छोड़कर श्राद्ध करना शुभ होता है।

  8. वन क्षेत्र – छोटे या बड़े जंगल में साफ और पवित्र स्थान पर श्राद्ध किया जा सकता है।

Ankita Yadav
Author: Ankita Yadav

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