यूपी बना iPhone निर्माण का नया ठिकाना, भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की ओर बड़ा कदम

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

उत्तर प्रदेश अब iPhone निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से उभर रहा है। ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में Apple ने अपने स्मार्टफोन का निर्माण शुरू कर दिया है, जो राज्य की औद्योगिक छवि को नया आयाम देने के साथ-साथ भारत को वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अब तक iPhone का उत्पादन मुख्य रूप से चीन में होता था, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य और भारत में अनुकूल माहौल के चलते Apple ने अपनी सप्लाई चेन को भारत की ओर मोड़ना शुरू किया है। Foxconn और Tata Electronics जैसी कंपनियां इसमें Apple का सहयोग कर रही हैं।

हाल ही में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में इन कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए बड़े निवेश का ऐलान किया था। इसके बाद प्रदेश में iPhone निर्माण की दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश की नई औद्योगिक पहचान बताते हुए कहा कि प्रदेश अब सिर्फ भारत का नहीं बल्कि वैश्विक निवेश का केंद्र बन रहा है। iPhone जैसे प्रीमियम ब्रांड का यहां निर्माण शुरू होना इसी बात का प्रमाण है।

क्यों अहम है भारत में iPhone निर्माण?

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में iPhone निर्माण से न केवल लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि भारत तकनीकी उत्पादन के क्षेत्र में चीन को टक्कर देने की स्थिति में आ जाएगा। Apple फिलहाल भारत में तीन प्रमुख iPhone मॉडल्स का निर्माण कर रहा है और आने वाले दो वर्षों में यह संख्या चीन के बराबर हो सकती है।

यूपी सरकार का बड़ा समर्थन


प्रदेश सरकार ने iPhone मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं लागू की हैं—जैसे ज़मीन की रियायती दरों पर उपलब्धता, तेज़ अप्रूवल की सुविधा (सिंगल विंडो सिस्टम), बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का सुलभ प्रबंधन। इसका असर यह हुआ कि नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में iPhone निर्माण इकाइयां तेज़ी से बढ़ रही हैं।

भारत के लिए आर्थिक अवसर

iPhone निर्माण से भारत के निर्यात क्षेत्र को भी बल मिलेगा। Apple भारत में बने iPhone को यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में भेजेगा, जिससे विदेशी मुद्रा की आमद में इज़ाफा होगा। इसके अलावा, भारत की GDP में भी सकारात्मक योगदान देखने को मिलेगा।

चुनौतियाँ अभी भी मौजूद

हालांकि, देश में सेमीकंडक्टर और कुछ हाई-टेक पुर्जों का निर्माण सीमित स्तर पर होता है, जिससे पूरी तरह आत्मनिर्भर iPhone निर्माण अभी चुनौतीपूर्ण है। लेकिन PLI (Production Linked Incentive) योजना और विदेशी तकनीकी भागीदारी से यह बाधाएं भी जल्द पार की जा सकेंगी।

Ankita Yadav
Author: Ankita Yadav

Leave a Comment

और पढ़ें